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बृहत्संहिता • अध्याय 57 • श्लोक 1
आमं तिन्दुकमामं कपित्थकं पुष्यमपि च शाल्मल्याः । बीजानि शल्लकीनां धन्वनवल्को वचा चेति ॥
तेन्दू के कच्चे फल, कैथ के कच्चे फल, सेमल के फूल, शल्लकी ( सालई) वृक्ष के बीज, धन्वन वृक्ष की छाल और वच-इन सबको एक द्रोणतुल्य जल में मिलाकर काढ़ा बनाते हुये
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