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बृहत्संहिता • अध्याय 56 • श्लोक 9
भूमयो ब्राह्मणादीनां याः प्रोक्ता वास्तुकर्मणि । ता एव तेषां शस्यन्ते देवतायतनेष्वपि ॥
पहले ब्राह्मण आदि वर्णों को गृह बनाने के लिये जिस प्रकार की भूमि शुभ कही गई है; देवालय बनाने के लिये भी उन वर्षों के लिये वैसी ही भूमि श्रेष्ठ होती है।
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