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बृहत्संहिता • अध्याय 56 • श्लोक 6
कौश्चकाञ्चीकलापाश्च कलहंसकलस्वराः । नद्यस्तोयांशुका यत्र शफरीकृतमेखलाः ॥
जिसका क्रौद्ध पक्षीरूप काञ्ची-कलाप, कलहंसों का मधुर शब्दरूप शब्द, तट में स्थित फूले हुये वृक्षरूप कर्णपूर, रूप उठे हुये स्तन और हंसरूप हास्य है
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