जहाँ हंस, कारण्डव, क्रौञ्च और चक्रवाक शब्द कर रहे हों और जहाँ पर तट में स्थित निचुल वृक्षों की छाया में जीव विश्राम करते हों, ऐसे सरोवर में देवगण सदा निवास तथा विहार करते हैं ।
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