मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 56 • श्लोक 5
हंसकारण्डवक्रौञ्चचक्रवाकविराविषु । पर्यन्तनिचुलच्छायाविश्रान्तजलचारिषु ॥
जहाँ हंस, कारण्डव, क्रौञ्च और चक्रवाक शब्द कर रहे हों और जहाँ पर तट में स्थित निचुल वृक्षों की छाया में जीव विश्राम करते हों, ऐसे सरोवर में देवगण सदा निवास तथा विहार करते हैं ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें