मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 56 • श्लोक 27
सिंहः सिंहाक्रान्तो द्वादशकोणोऽष्टहस्तविस्तीर्णः । चत्वारोऽञ्जनरूपाः पश्चाण्डयुतस्तु चतुरस्रः ॥
'सिंह' नामक प्रासाद सिंह की प्रतिमाओं से शोभित, द्वादशास्त्र और आठ हाथ विस्तार वाला होता है। शेष चार प्रासाद (वृत्त, चतुष्कोण, षोडशाश्रि और अष्टानि ) अपने नाम के समान ही आकार वाले और काले होते हैं अर्थात् इनके अन्दर अन्धकार रहता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें