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बृहत्संहिता • अध्याय 56 • श्लोक 25
वृष एक भूमिशृङ्गो द्वादशहस्तः समन्ततो वृत्तः । हंसो हंसाकारो घटोऽष्टहस्तः कलशरूपः ॥
'वृष' नामक प्रासाद एक भूमि वाला, एक शृङ्ग वाला, बारह हाथ विस्तार वाला और चारो तरफ से वृत्ताकार होता है। 'हंस' प्रासाद हंस पक्षी की आकृति वाला, बारह हाथ विस्तार वाला, एक भूमि और एक शृङ्ग वाला होता है। 'घट' नामक प्रासाद कलश की आकृति वाला, आठ हाथ विस्तार वाला, एक शृङ्ग और एक भूमि वाला होता है।
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