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बृहत्संहिता • अध्याय 56 • श्लोक 22
वृत्तः समुहनामा पद्मः पद्माकृतिः शया अष्टौ । शृङ्गेणैकेन भवेदेकैव च भूमिका तस्य ॥
'समुद्ग' नामक प्रासाद गोल और 'पद्म' नामक प्रासाद कमल की आकृति वाला होता है तथा दोनों एक शृङ्ग तथा एक ही भूमि वाले होते हैं।
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