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बृहत्संहिता • अध्याय 56 • श्लोक 21
जालगवाक्षकयुक्तो विमानसंज्ञस्त्रिसप्तकायामः । नन्दन इति षड्भौमो द्वात्रिंशः षोडशाण्डयुतः ॥
'विमान' नामक प्रासाद जालीदार खिड़‌कियों से युक्त, इक्कीस हाथ विस्तार वाला, आठ भूमि वाला और छ: कोण वाला होता है। 'नन्दन' नामक प्रासाद छ: कोण वाला, छः भूमि वाला, बत्तीस हाथ तुल्य विस्तार वाला और सोलह अण्डों (शिखरों) से युक्त होता है।
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