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बृहत्संहिता • अध्याय 56 • श्लोक 15
द्वारमानाष्टभागोना प्रतिमा स्यात् सपिण्डिका । द्वौ भागौ प्रतिमा तन्त्र तृतीयांशश्च पिण्डिका ॥
द्वार की ऊँचाई में उसका अष्टमांश घटा कर जो शेष बचे, उतनी पिण्डिका ( देवतास्थापन को पीठिका ) को लेकर देवप्रतिमा की ऊँचाई होती है। पीठिकासहित प्रतिमा की ऊँचाई का तीन भाग करके दो भाग के बराबर ऊँची प्रतिमा और एक भाग के समान पीठिका बनानी चाहिये। यह प्रमाण समस्त प्रासादों में जानना चाहिये।
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