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बृहत्संहिता • अध्याय 56 • श्लोक 13
उच्छ्रायात् पादविस्तीर्णा शाखा तद्वदुदुम्बरः । विस्तारपादप्रतिमं बाहुल्यं शाखयोः स्मृतम् ॥
द्वार की ऊँचाई तुल्य शाखा (चौखट का बाजू) और उदुम्बर (चौखट के ऊपर की लकड़ी) को चौड़ाई होती है तथा शाखा की चौथाई को चौथाई के तुल्य शाखाओं की मोटाई होती है। शाखाओं की चौड़ाई के बीच में तीन, पाँच, सात या नव शाखायें होने से द्वार श्रेष्ठ होता है।
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