देवालय का जितना विस्तार हो, उससे दूनी ऊँचाई और ऊँचाई की तिहाई कटि होती है। सोढ़ी के ऊपर जहाँ से देवालय का प्रारम्भ होता है उसको 'कटि' कहते हैं।
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