मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 55 • श्लोक 8
शुचिर्भूत्वा तरोः पूजां कृत्वा स्नानानुलेपनैः । रोपयेद्रोपित श्चैव पत्रैस्तैरेव जायते ॥
पवित्र होकर स्नान, चन्दन आदि से वृक्ष की पूजा करके उसे दूसरे स्थान पर लगाना चाहिये। इस तरह लगाने से अपने पूर्व पत्रों से युत वृक्ष ही लग जाता है, अर्थात् सूखता नहीं है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें