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बृहत्संहिता • अध्याय 55 • श्लोक 31
ध्रुवमृदुमूलविशाखा गुरुभं श्रवणस्तथाश्विनी हस्तः । उक्तानि दिव्यदृग्भिः पादपसंरोपणे भानि ॥
तीनों उत्तरा, रोहिणी, मृगशिरा, रेवती, चित्रा, अनुराधा, मूल, विशाखा, पुष्य, श्रवण, अश्विनी, हस्त-इन नक्षत्रों को दिव्य दृष्टि वाले मुनियों ने वृक्षों का रोपन करने के लिये उत्तम कहा है।
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