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बृहत्संहिता • अध्याय 55 • श्लोक 30
माहिषगोमयपृष्टान्यस्य करीषे च तानि निक्षिप्य । करकाजलमृद्योगे न्युप्तान्यह्ना फलकराणि ॥
इस तरह सात बार करने के पश्चात् उसको भैंस के गोबर से घिस कर भैंस के सूखे गोबर के ढेर पर रख दे। तत्पश्चात् ओलों से भींगी हुई मिट्टी में उन बीजों को बोने पर एक दिन में ही फलयुत पौधा लग जाता है।
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