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बृहत्संहिता • अध्याय 55 • श्लोक 23
क्षीरे शृते चाप्यनया सुशीते ताला शतं स्थाप्य कपित्थबीजम् । दिने दिने शोषितमर्कपादैर्मासं विधिस्त्वेष ततोऽधिरोप्यम् ॥
इन आठ मूलों को दूध में डालकर भरपूर गर्म करे। बाद में उस दूध को ठण्ड्रा कर उसमें कैच के बीज को डाल दे। दोनों हाथों से सौ बार ताली बजाने में जितना समय लगता है, उतनी देर तक उस बीज को दूध में रहने दे। बाद में उसको दूध से निकाल कर धूप में सुखा ले।
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