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बृहत्संहिता • अध्याय 55 • श्लोक 19
वासराणि दश दुग्धभावितं बीजमाज्ययुतहस्तयोजितम् । गोमयेन बहुशो विरूक्षितं क्रौडमार्गपिशितैश्च धूपितम् ॥
किसी वृक्ष के बीज को घृत लगाये हुये हाथ से चुपड़ कर दूध में डाल दे। इसी प्रकार लगातार दश दिन तक करता रहे। बाद में उसको गोबर से अनेक बार मल कर रूखा करके सूकर और हिरण
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