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बृहत्संहिता • अध्याय 55 • श्लोक 17
अविकाजशकृच्चूर्णस्याढके द्वे तिलाढकम्। सक्तुप्रस्थो जलद्रोणे गोमांसतुलया सह ॥
भेड़ और बकरी की पेंगन ( भेड़ारी) का चूर्ण दो आढ़क, तिल एक आढ़क, सत्तू ( सतुआ) एक प्रस्थ, जल एक द्रोण, गौ का मांस एक तुला-इन सबको मिलाकर एक पात्र में
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