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बृहत्संहिता • अध्याय 55 • श्लोक 15
चिकित्सितमथैतेषां विडङ्गघृतपङ्काक्तान् सेचयेत् क्षीरवारिणा ॥
इन रोगी वृक्षों की चिकित्सा करनी चाहिये। पहले वृक्ष का जो अंग पूर्वोक्त विकार- युत हो, उसको शस्त्र से काट डालना चाहिये। फिर वायविडङ्ग, घृत और पङ्क ( कीचड़ = कीच ) को मिला कर वृक्षों में लेप करना चाहिये। बाद में दूधमिश्रित जल से उसे सींचना चाहिये।
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