मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 55 • श्लोक 13
अभ्यासजातास्तरवः संस्पृशन्तः परस्परम् । मित्रैर्मूलैश्च न फलं सम्यग्यच्छन्ति पीडिताः ॥
यदि एक वृक्ष दूसरे वृक्ष के समीप हो, परस्पर स्पर्श करता हो या दोनों की जड़ें इकट्ठी हों तो वे वृक्ष पीड़ित होते हैं और अच्छी तरह फल नहीं देते।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें