अभ्यासजातास्तरवः संस्पृशन्तः परस्परम् । मित्रैर्मूलैश्च न फलं सम्यग्यच्छन्ति पीडिताः ॥
यदि एक वृक्ष दूसरे वृक्ष के समीप हो, परस्पर स्पर्श करता हो या दोनों की जड़ें इकट्ठी हों तो वे वृक्ष पीड़ित होते हैं और अच्छी तरह फल नहीं देते।
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