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बृहत्संहिता • अध्याय 55 • श्लोक 1
प्रान्तच्छायाविनिर्मुक्ता न मनोज्ञा जलाशयाः । यस्मादतो जलप्रान्तेष्वारामान् विनिवेशयेत् ॥
वापी, कूप, तालाब आदि जलाशयों के प्रान्त छायारहित हों तो सुन्दर नहीं होता; अतः जलाशयों के किनारे पर बागीचा लगाना चाहिये ।
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