नैर्ऋतकोणे बालक्षयं च वनिताभयं च वायव्ये । दिक्त्रयमेतत्त्यक्त्वा शेषासु शुभावहाः कूपाः ॥
नैऋत्य कोण में कूप हो तो बालकों का क्षय और वायव्य कोण में हो तो त्रियों को भय होता है। शेष पाँच दिशाओं में कूप का होना शुभ होता है।
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