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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 96
न्यग्रोधपलाशोदुम्बरैः समेतैस्त्रिभिर्जलं तदधः । वटपिप्पलसमवाये तद्वद्वाच्यं शिरा चोदक् ॥
जहाँ बढ़, पीपल, गूलर-ये तीनों वृक्ष इकट्ठे हों तथा जहाँ बड़, पीपल-ये दोनों वृक्ष एक साथ अवस्थित हों, वहाँ इन वृक्षों के नीचे तीन हाथ खोदने पर जल और उत्तर शिरा मिलती है।
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