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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 95
वल्मीकानां पङ्क्त्यां यद्येकोऽभ्युच्छ्रितः शिरा तदधः । शुष्यति न रोहते वा सस्यं यस्यां च तत्राम्भः ॥
जहाँ बहुत वल्मीकों में एक वल्मीक सबसे ऊँचा हो, वहाँ उस ऊँचे वल्मीक के नीचे चार पुरुषप्रमाण खोदने पर जल मिलता है अथवा जिस खेत में धान्य जम कर सूख जाय या जमे ही नहीं, वहाँ चार पुरुषप्रमाण नीचे जल कहना चाहिये।
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