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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 90
एकनिभा यत्र मही तृणतरुवल्पीकगुल्मपरिहीना । तस्यां यत्र विकारो भवति धरित्र्यां जलं तत्र ॥
जहाँ तृण, वृक्ष, वल्मीक और गुल्मों से रहित एक वर्ष की भूमि हो तथा उस भूमि में कहीं एक जगह विकार दिखाई दे तो उस विकारयुत भूमि के पाँच पुरुषप्रमाण नीचे जल कहना चाहिये।
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