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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 86
मरुदेशे यच्चिङ्गं न जाङ्गले तैर्जलं विनिर्देश्यम् । जम्बूवेतसपूर्वैर्ये पुरुषास्ते मरौ द्विगुणाः ॥
जिन चिह्नों से मरुस्थल में जल-ज्ञान कहा गया है, उन चिह्नों से जाङ्गल ( स्वल्प जल वाले) देश में जल-ज्ञान नहीं कहना चाहिये। पहले जामुन, बेंत आदि के द्वारा जल-ज्ञान के समय जो पुरुष-प्रमाण कहा गया है, उसको द्विगुणित करके मरु देश में ग्रहण करना चाहिये।
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