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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 84
वल्मीकेन परिवृतः श्वेतो रोहीतको भवेद्यस्मिन् । पूर्वेण हस्तमात्रे सप्तत्या मानवैरम्बु ॥
जहाँ वल्मीक से घिरा हुआ सफेद रोहीतक का वृक्ष हो, वहाँ उस वृक्ष से पूर्व दिशा में एक हाथ पर सत्तर पुरुषप्रमाण नीचे जल होता है।
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