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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 81
प्रन्थिप्रचुरा यस्मिन् शमी भवेदुत्तरेण वल्मीकः । पश्चात् पश्चकरान्ते शतार्थसंख्यैर्नरैः सलिलम् ॥
जहाँ पर अनेक गाँठों से युत शमी वृक्ष हो और उसके उत्तर वल्मीक हो तो उस शमी वृक्ष के पश्चिम पाँच हाथ पर पत्चास पुरुषप्रमाण नीचे जल होता है।
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