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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 73
सुरसं जलमादौ दक्षिणा शिरा वहति चोत्तरेणान्या । पिष्टनिभः पाषाणो मृत् श्वेता वृश्चिकोऽर्धनरे ॥
यहाँ पर मधुर जल होता है। पहले दक्षिण शिरा और बाद में उत्तर शिरा बहती है, आटे के समान सफेद पत्थर तथा सफेद मिट्टी निकलती है और आधा पुरुषप्रमाण नीचे बिच्छू दिखाई देता है।
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