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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 72
बदरीरोहितवृक्षौ सम्पृक्तौ चेद्विनापि वल्मीकम् । हस्तत्रयेऽम्बु पश्चात् षोडशभिर्मानवैर्भवति ॥
वल्मीक विना भी बेर एवं लाल करञ्ज- ये दोनों वृक्ष इकट्ठे दिखाई दें तो उन वृक्षों से तीन हाथ आगे पश्चिम दिशा में सोलह पुरुषप्रमाण नीचे जल होता है। यहाँ पर मधुर जल होता है।
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