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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 71
क्षारं पयोऽत्र नकुलोऽर्धमानवे ताम्रसन्निभश्चाश्मा । रक्ता च भवति वसुधा वहति शिरा दक्षिणा तत्र ॥
तथा आधा पुरुष नीचे नेवला, ताम्रवर्ण का पत्थर और लाल रंग की मिट्टी निकलती है। यहाँ दक्षिण शिरा बहती है।
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