यदि वा सुवर्णनाम्नस्तरोर्भवेद्वामतो भुजङ्गगृहम् । हस्तद्वये तु याम्ये पञ्चदशनरावसानेऽम्बु ॥
धत्तूर वृक्ष के उत्तर वल्मीक हो तो उस वृक्ष से दो हाथ दक्षिण पन्द्रह पुरुष नीचे जल होता है। इस खात में खारा जल होता है
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