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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 66
प्रथमे पुरुषे भुजगः सितासितो हस्तमात्रमूर्त्तिश्च । दक्षिणतो वहति शिरा सक्षारं भूरि पानीयम् ॥
यहाँ खोदने पर एक पुरुषप्रमाण नीचे एक हाथ लम्बा चितकबरा सर्प और उसके नीचे बहुत खारा जल बहने वाली दक्षिण शिरा निकलती है।
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