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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 63
र्वोत्तरेण पीलोर्यदि वल्पीको जलं भवति पश्चात् । उत्तरगमना च शिरा विज्ञेया पश्चभिः पुरुषैः ॥
यदि पीलु ( पिलुआ = 'पीलौ गुडफलः संसी'त्यमरः) वृक्ष के ईशान कोण में वल्मीक हो तो उस वृक्ष से साढ़े चार हाथ पश्चिम दिशा में पाँच पुरुष नीचे उत्तर बहने वाली शिरा होती है।
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