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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 62
मरुदेशे भवति शिरा यथा तथातः परं प्रवक्ष्यामि । ग्रीवा करभाणामिव भूतलसंस्थाः शिरा यान्ति ॥
अब मरु देश में जिस प्रकार की शिरा होती है, उसको कहते हैं। जैसे-ऊँट की गर्दन की तरह भूमि में ऊँची-नीची शिरा होती है।
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