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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 60
यस्यामूष्मा धात्र्यां धूमो वा तत्र वारि नरयुगले । निर्देष्टव्या च शिरा महता तोयप्रवाहेण ॥
जिस स्थान से भाप या घूंआ निकलता हुआ दिखाई दे, वहाँ दो पुरुष नीचे बहुत जल बहने वाली शिरा कहनी चाहिये।
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