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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 52
अतृणे सतृणा यस्मिन् सतृणे तृणवर्जिता मही यत्र । तस्मिन् शिरा प्रदिष्टा वक्तव्यं वा धनं चास्मिन् ॥
तृणरहित प्रदेश में कोई एक स्थान तृणयुत दिखाई दे अथवा तृणयुत प्रदेश में कोई एक स्थान तृणरहित दिखाई दे तो उस स्थान पर साढ़े चार पुरुष नीचे शिरा अथवा धन होता है।
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