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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 50
तिलकाप्रातकवरुणक भल्लातकविल्वतिन्दुकाङ्कोलाः । पिण्डारशिरीषाञ्जनपरूषका वसुलोऽतिबला ॥
जहाँ पर निर्मल वल्मीक से युत तिलक, आम्रातक (अम्बाड़ा), वरुणक (बरण), भिलावा, बेल, तेन्दु (तेन्दुआ)
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