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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 43
अश्मन्तकस्य वामे बदरी वा दृश्यतेऽहिनिलयो वा । ष‌भिरुदक् तस्य करैः सार्धे पुरुषत्रये तोयम् ॥
अश्मन्तक वृक्ष के बाँयीं तरफ बेर का वृक्ष या वल्मीक हो तो उस वृक्ष से छः हाथ आगे उत्तर दिशा में साढ़े तीन पुरुष नीचे जल होता है।
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