अश्मन्तकस्य वामे बदरी वा दृश्यतेऽहिनिलयो वा । षभिरुदक् तस्य करैः सार्धे पुरुषत्रये तोयम् ॥
अश्मन्तक वृक्ष के बाँयीं तरफ बेर का वृक्ष या वल्मीक हो तो उस वृक्ष से छः हाथ आगे उत्तर दिशा में साढ़े तीन पुरुष नीचे जल होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।