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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 42
कर्बुरकोऽहिः पुरुषे वृष्णा मृत् पुटभिदपि च पाषाणः । श्वेता मृत् पश्चिमतः शिरा ततश्चोत्तरा भवति ॥
उसके नीचे परतदार पत्थर, उसके नीचे सफेद मिट्टी तथा एक पश्चिमवाहिनी शिरा और उसके नीचे उत्तरवाहिनी शिरा होती है।
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