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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 41
याम्येन कपित्यस्याहिसंश्रयश्चेदुदग्जलं वाच्यम् । सप्त परित्यज्य करान् खात्वा पुरुषान् जलं पश्च ॥
कपित्थ (कैच) के वृक्ष से दक्षिण में वल्मीक हो तो उस वृक्ष से सात हाथ उत्तर दिशा में पाँच पुरुष नीचे जल होता है। यहाँ पर एक पुरुषतुल्य नीचे चितकबरा सर्प और काली मिट्टी होती है।
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