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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 34
कच्छपकः पुरुषार्चे प्रथमं चोद्भिद्यते शिरा पूर्वा। उदगन्या स्वादुजला हरितोऽश्माधस्ततस्तोयम् ॥
यहाँ पर आधा पुरुष नीचे कछुआ, उसके नीचे पूर्ववाहिनी शिरा, उसके नीचे उत्तरवाहिनी शिरा, उसके नीचे हरे रंग का पत्थर और उसके नीचे जल निकलता है।
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