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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 3
पुरुहूतानलयमनिऋतिवरुणपवनेन्दुशङ्करा देवाः । विज्ञातव्याः क्रमशः प्राच्याद्यानां दिशां पतयः ॥
पूर्व आदि आठ दिशाओं के क्रम से इन्द्र, अग्नि, यम, राक्षस, वरुण, वायु, चन्द्र और शिव स्वामी होते हैं। इन आठ दिक्पतियों के नाम से आठ (ऐन्द्री, आग्नेयी, याम्या इत्यादि) ही शिरायें प्रसिद्ध हैं।
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