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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 28
प्रथमे पुरुषे भुजगः कमलोदरसन्निभो मही रक्ता। कुरुविन्दः पाषाणश्चिह्नान्येतानि वाच्यानि ॥
यहाँ पर खोदने के समय एक पुरुष नीचे कमलपुष्प के मध्य के समान रंग का सर्प, उसके नीचे लाल वर्ण को भूमि और उसके नीचे कुरुविन्द नामक पत्थर निकलता है। ये सभी चिह्न यहाँ पर कहने चाहिये।
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