सकुशः सित ऐशान्यां वल्मीको यन्त्र कोविदारस्य । मध्ये तयोर्नरैरर्धपश्वमैस्तोयमक्षोभ्यम् ॥
जहाँ पर कोविदारक ( छितिवन सप्तपर्ण) वृक्ष के ईशान कोण में कुशायुक्त श्वेत वल्मीक हो, वहाँ पर सप्तपर्ण वृक्ष और वल्मीक के मध्य में साढ़े पाँच पुरुष नीचे अधिक जल होता है।
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