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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 26
श्वेतो विश्वम्भरकः प्रथमे पुरुषे तु कुङ्कुमाभोऽश्मा । अपरस्यां दिशि च शिरा नश्यति वर्षत्रयेऽतीते ॥
उसके नीचे केशर के रंग का पत्थर और उसके नीचे पश्चिम दिशा को बहने वाली शिरा निकलती है; परन्तु यह शिरा तीन वर्ष बाद नष्ट हो जाती है अर्थात् जल नष्ट हो जाता है।
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