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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 25
तस्यैव पश्चिमायां दिशि वल्मीको यदा भवेद्धस्ते । तत्रोदग् भवति शिरा चतुर्भिरर्धाधिकैः पुरुषैः ॥
यदि बहेड़े के वृक्ष से पश्चिम दिशा में वल्मीक हो तो उस वृक्ष से उत्तर दिशा में साढ़े चार पुरुष नीचे शिरा होती है। यहाँ पर खोदने के समय एक पुरुष नीचे श्वेत रंग का विश्वम्भरक (प्राणिविशेष) दिखाई देता है।
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