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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 22
मृन्त्रीलोत्पलवर्णा कापोता दृश्यते ततस्तस्मिन् । हस्तेऽजगन्यको मत्स्यकः पयोऽल्पं च सक्षारम् ॥
वाली मिट्टी और उसके नीचे कबूतर के रंग की मिट्टी दिखाई देती है तथा एक हाथ नीचे बकरे के समान गन्ध वाली मछली और उसके नीचे खारा जल निकलता है।
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