किन्तु वही जल पृथ्वी की विशेषता से तत्तत् स्थानों में अनेक प्रकार के रस और स्वाद वाला हो जाता है। इस तरह भूमि के वर्ण और रस के समान ही जल के भी रस और वर्ण सिद्ध होते हैं; अतः भूमि, वर्ण और रस का परीक्षण-पूर्वक जल के रस और स्वाद का परीक्षण करना चाहिये।
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