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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 18
बिल्वोदुम्बरयोगे विहाय हस्तत्रयं तु याम्येन । पुरुषस्त्रिभिरम्बु भवेत् कृष्णोऽर्द्धनरे च मण्डूकः ॥
जहाँ वेल के वृक्ष से युक्त गूलर का वृक्ष हो तो उससे तीन हाथ दक्षिण दिशा में तीन पुरुष नीचे जल की स्थिति होती है। यहाँ पर आधा पुरुष नीचे कृष्ण वर्ण का मेढ़क निकलता है।
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