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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 17
सपलाशा बदरी चेद् दिश्यपरस्यां ततो जलं भवति । पुरुषत्रये सपादे पुरुषेऽत्र च दुण्डुभश्चिह्नम् ॥
जलरहित देश में पलाश (ढाक) के वृक्ष से युक्त वेर का वृक्ष हो तो उससे तीन हाथ पश्चिम दिशा में सवा तीन पुरुष नीचे जल होता है। यहाँ पर एक पुरुष नीचे विषरहित सर्प मिलता है।
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